आख़िरी बस
आख़िरी बस, कहानी, नीतू सिंहआख़िरी बस
कहाँ पढ़ें, सुनें या खरीदें
कहानी के बारे में
रात की आख़िरी बस में मिले दो अजनबी, और एक सफ़र जो उतरने के बाद भी चलता रहा।
एक अंश
बस हिचकोले लेती हुई आगे बढ़ी।
"आप रोज़ इसी बस से जाती हैं?" उसने पूछा।
मैंने कहा, "नहीं, आज पहली बार।"
वह मुस्कराया, जैसे उसे यह पहले से पता हो।